𝙺𝚑𝚊𝚖𝚘𝚜𝚑 𝙱𝚊𝚊𝚝𝚎𝚗
Wednesday, July 3, 2019
क्या दस्तख़त दूँ अपने वजूद का दोस्तों...
किसी के ज़हन में आऊं और वो मुस्कुरा दे
बस यही काफी है...!!
ऊँचा होने का गुमान और छोटा होने का मलाल मिथ्या है,
खेल खत्म होने के बाद, शतरंज के सब मोहरे एक ही डिब्बे मे रखे जाते हैं !
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